महाप्रबंधक त्रिभुवन सिंह रावत ने मौके का किया निरीक्षण, रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की बात; जल्द जांच समिति गठित होने के लगाए जा रहे कयास
हल्दूचौड़। ध्वस्तीकरण और समतलीकरण के नाम पर निर्धारित सीमा से अधिक गहरी खुदाई कर उपखनिज निकाले जाने की शिकायतों से घिरे सोयाबीन एवं वनस्पति कॉम्प्लेक्स में अब मामला विभागीय जांच की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एसडीएम के निरीक्षण के बाद शनिवार को उत्तराखंड राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के महाप्रबंधक त्रिभुवन सिंह रावत ने मौके पर पहुंचकर परिसर का निरीक्षण किया और पूरे मामले की जानकारी ली।
महाप्रबंधक त्रिभुवन सिंह रावत ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें इस मामले की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के बाद वह पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार कर अपने उच्च अधिकारियों को प्रेषित करेंगे।
मानक से अधिक गहरी खुदाई का मामला सामने आया
निरीक्षण के दौरान परिसर के कुछ हिस्सों में निर्धारित मानक से अधिक गहरी खुदाई होने की बात सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया है। हालांकि, खुदाई किन परिस्थितियों में और किसके निर्देश पर निर्धारित सीमा से अधिक हुई, इसका स्पष्ट पता विभागीय जांच के बाद ही चल सकेगा।
महाप्रबंधक के अनुसार अब मौके की वास्तविक स्थिति और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके बाद उच्च स्तर पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
जल्द गठित हो सकती है जांच समिति
महाप्रबंधक द्वारा उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजे जाने की बात सामने आने के बाद अब इस पूरे मामले में जल्द जांच समिति गठित किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं। समिति के माध्यम से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि ध्वस्तीकरण एवं समतलीकरण के दौरान किसी प्रकार की अनियमितता हुई है अथवा निर्धारित प्रक्रिया और शर्तों के अनुरूप ही कार्य कराया गया।
संभावित जांच में ध्वस्तीकरण कार्य से संबंधित टेंडर, उसकी शर्तें, निर्धारित खुदाई की सीमा, मौके पर हुई खुदाई, निकलने वाली सामग्री तथा उसके निस्तारण से जुड़े पहलुओं को जांच के दायरे में लिए जाने की संभावना है।
अब जूनियर इंजीनियर की निगरानी में होगा काम
महाप्रबंधक त्रिभुवन सिंह रावत ने यह भी बताया कि भविष्य में परिसर में होने वाले कार्य जूनियर इंजीनियर मानवेंद्र सिंह की देखरेख में कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य मौके पर होने वाले कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी प्रकार के असमंजस या अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
यूसीएफ की ओर से निगरानी व्यवस्था को मजबूत किए जाने के इस निर्णय को मौजूदा विवाद के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टेंडर से मलबे के निस्तारण तक होगी पड़ताल
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि ध्वस्तीकरण और समतलीकरण के लिए जारी टेंडर में क्या शर्तें निर्धारित की गई थीं और मौके पर उनका कितना पालन हुआ। इसके साथ ही ध्वस्तीकरण के दौरान निकलने वाले मलबे और अन्य सामग्री की मात्रा, उसकी आवाजाही तथा निस्तारण की प्रक्रिया भी जांच का अहम हिस्सा बन सकती है।
यह भी देखा जाना है कि परिसर से बाहर ले जाई गई या ले जाए जाने वाली सामग्री का विधिवत अभिलेखीकरण और मिलान किया गया अथवा नहीं।
रिपोर्ट से साफ होगी तस्वीर
एसडीएम के निरीक्षण के बाद यूसीएफ के महाप्रबंधक के मौके पर पहुंचने और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजने की बात से मामले में विभागीय स्तर पर गंभीरता दिखाई देने लगी है। अब संभावित जांच समिति की रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि निर्धारित मानक से अधिक गहरी खुदाई क्यों और कैसे हुई, उससे कितनी सामग्री निकली और क्या ध्वस्तीकरण कार्य में निर्धारित शर्तों या नियमों का उल्लंघन हुआ।
फिलहाल यूसीएफ स्तर से रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके बाद जांच समिति गठित होती है या नहीं और जांच का दायरा क्या रहता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

