‘विकसित उत्तराखंड विजन-2047’ को लेकर मंथन, दिसंबर तक तैयार होंगी जनपद स्तरीय कार्ययोजनाएं
देहरादून। राज्य के समग्र और दीर्घकालिक विकास के लक्ष्य को लेकर मंगलवार को राजपुर रोड स्थित सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में “विकसित उत्तराखंड विजन-2047” विषय पर उच्च स्तरीय ब्रेनस्टॉर्मिंग बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा करते हुए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और उपलब्ध संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया।
बैठक का शुभारंभ करते हुए प्रमुख सचिव, वन आर. के. सुधांशु ने कहा कि विकसित उत्तराखंड विजन-2047 का प्रारूप लगभग तैयार हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब अगले चरण में सभी जनपदों के लिए अलग-अलग जनपद स्तरीय विजन-2047 कार्ययोजनाएं तैयार की जाएंगी, जिन्हें दिसंबर 2026 तक अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने वाले प्रमुख क्षेत्रों उद्यानिकी, पर्यटन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी रणनीतियों पर मंथन किया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि इन क्षेत्रों के माध्यम से रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।
समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण को विजन-2047 का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए अधिकारियों ने बालिकाओं में शुरुआती स्तर से ही STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी एवं गणित) शिक्षा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि भविष्य में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ाई जा सके।
बैठक में यह भी कहा गया कि विजन-2047 के तहत निर्धारित लक्ष्यों और संकेतकों की प्रभावी निगरानी के लिए राज्य में केंद्रीकृत डेटा सिस्टम विकसित किया जाना आवश्यक है। इसके लिए प्रत्येक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण डेटा संग्रहण और मजबूत डेटा इकोसिस्टम तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री आर. के. सुधांशु, प्रमुख सचिव, नियोजन डॉ. आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष सचिव मुख्यमंत्री डॉ पराग मधुकर धकाते, विभिन्न विभागों के सचिव एवं अपर सचिव, मंडलायुक्त, सभी जिलाधिकारी तथा सेतु आयोग और सीपीपीजीजी के विशेषज्ञों ने प्रतिभाग कर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। अधिकारियों ने विकसित उत्तराखंड के लक्ष्य को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।
